Latest Posts
Latest Albums

Some glimpses Holi Milan 2019

IMG-20190330-WA0072.jpgIMG-20190401-WA0045.jpgIMG-20190401-WA0043.jpgIMG-20190401-WA0046.jpgIMG-20190330-WA0077.jpg

Holi Milan Songs

cover.jpgholi 1.jpgholi 2.jpgholi 3.jpgholi 4.jpgholi 5.jpgholi 6.jpgholi 7.jpgholi 8.jpgholi 9.jpgholi 10.jpgholi 11.jpgholi 12.jpgholi 13.jpgholi 14.jpg

Holi Celebration 2018

BQXN7926.JPGABXX9167.JPGBBHX7306.JPGCGDK6474.JPGIMG_8843.JPGIMG_8862.JPGIMG_8866.JPGIMG_8867.JPGIMG_8877.JPGMEEF6223.JPGSTXC2626.JPGPMGE2396.JPGTTRQ4711.JPG
New Discussions
Love and best wishes to all pretty ladies for Hartaalika vrat today . May you all are blessed with l…
by Manjusha Jauhari
1
Let's thoughts flow :)
by Piyush Chaturvedi
1
Thanks to all the team members who helped organising the Holi Milan function yesterday. It was colou…
by Manjusha Jauhari
1
From Rohit,Presenting our very own holi folk songs from the book - "Rang Jhar Barse Ri" , sung by my…
by Piyush Chaturvedi
1
Poori tayyari kar lo Gaana ki......
by Piyush Chaturvedi
5
Featured Discussions
Let's thoughts flow :)
by Piyush Chaturvedi
1
Poori tayyari kar lo Gaana ki......
by Piyush Chaturvedi
5
Featured Posts
हरतालिका तीज व्रत कथा

हरतालिका तीज व्रत कथा

हरतालिका तीज व्रत कथा  (Hartalika Teej Vrta Katha or Story):यह व्रत अच्छे पति की कामना से एवं पति की लम्बी उम्र के लिए किया जाता हैं .शिव जी ने माता पार्वती को विस्तार से इस व्रत का महत्व समझाया – माता गौरा ने सती के बाद हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया . बचपन से ही पार्वती भगवान शिव को वर के रूप में चाहती थी . जिसके लिए पार्वती जी ने कठोर ताप किया उन्होंने कड़कती ठण्ड में पानी में खड़े रहकर, गर्मी में यज्ञ के सामने बैठकर यज्ञ किया . बारिश में जल में रहकर कठोर तपस्या की . बारह वर्षो तक निराहार पत्तो को खाकर पार्वती जी ने व्रत किया . उनकी इस निष्ठा से प्रभावित होकर भगवान् विष्णु ने हिमालय से पार्वती जी का हाथ विवाह हेतु माँगा . जिससे हिमालय बहुत प्रसन्न हुए . और पार्वती को विवाह की बात
हरतालिका तीज पूजन विधी

हरतालिका तीज पूजन विधी

हरतालिका तीज पूजन विधी (Hartalika Teej Pujan Vidhi)हरतालिका पूजन प्रदोष काल में किया जाता हैं . प्रदोष काल अर्थात दिन रात के मिलने का समय .हरतालिका पूजन के लिए शिव, पार्वती एवं गणेश जी की प्रतिमा बालू रेत अथवा काली मिट्टी से हाथों से बनाई जाती हैं .फुलेरा बनाकर उसे सजाया जाता हैं .उसके भीतर रंगोली डालकर उस पर पटा अथवा चौकी रखी जाती हैं . चौकी पर एक सातिया बनाकर उस पर थाल रखते हैं . उस थाल में केले के पत्ते को रखते हैं .तीनो प्रतिमा को केले के पत्ते पर आसीत किया जाता हैं .सर्वप्रथम कलश बनाया जाता हैं जिसमे एक लौटा अथवा घड़ा लेते हैं . उसके उपर श्रीफल रखते हैं . अथवा एक दीपक जलाकर रखते हैं . घड़े के मुंह पर लाल नाडा बाँधते हैं . घड़े पर सातिया बनाकर उर पर अक्षत चढ़ाया जाता हैं.कलश का पूजन किया जात
हरतालिका पूजन सामग्री

हरतालिका पूजन सामग्री

हरतालिका पूजन सामग्री (Hartalika Teej Puja Samgri List)क्र    हरतालिका पूजन सामग्री1    फुलेरा विशेष प्रकार से  फूलों से सजा होता .2    गीली काली मिट्टी अथवा बालू रेत3    केले का पत्ता4    सभी प्रकार के फल एवं फूल पत्ते5    बैल पत्र, शमी पत्र, धतूरे का फल एवं फूल, अकाँव का फूल, तुलसी, मंजरी .6    जनैव, नाडा, वस्त्र,7    माता गौरी के लिए पूरा सुहाग का सामान जिसमे चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, मेहँदी आदि मान्यतानुसार एकत्र की जाती हैं . इसके अलावा बाजारों में सुहाग पुड़ा मिलता हैं जिसमे सभी सामग्री होती हैं .8    घी, तेल, दीपक, कपूर, कुमकुम, सिंदूर, अबीर, चन्दन, श्री फल, कलश .9    पञ्चअमृत- घी, दही, शक्कर, दूध, शहद .
हरतालिका तीज  कब मनाई जाती है और मुहूर्त क्या है ?

हरतालिका तीज कब मनाई जाती है और मुहूर्त क्या है ?

हरतालिका तीज  कब मनाई जाती है और मुहूर्त क्या है? (Hartalika Teej Date and Muhurat)हरितालिका तीज भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है. यह आमतौर पर अगस्त – सितम्बर के महीने में ही आती है. इसे गौरी तृतीया व्रत भी कहते है. यह इस वर्ष 1 सितम्बर 2019, दिन रविवार को मनाई जाएगी.प्रातः काल हरितालिका पूजा मुहूर्त    8:27 से 08:34    7 मिनटसांय काल हरितालिका पूजा मुहूर्त    06:39 – 8:56    2 घंटे 17 मिनटहरतालिका तीज नियम (Hartalika Teej Rules) :हरतालिका व्रत निर्जला किया जाता हैं, अर्थात पूरा दिन एवं रात अगले सूर्योदय तक जल ग्रहण नहीं किया जाता .हरतालिका व्रत कुवांरी कन्या, सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा किया जाता हैं .इसे विधवा महिलायें भी कर सकती हैं .हरतालिका व्रत का नियम हैं कि
जनेऊ क्या है ?

जनेऊ क्या है ?

जनेऊ क्या है ?आपने देखा होगा कि बहुत से लोग बाएं कांधे से दाएं बाजू की ओर एक कच्चा धागा लपेटे रहते हैं। इस धागे को जनेऊ कहते हैं। जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है। यह सूत से बना पवित्र धागा होता है, जिसे व्यक्ति बाएं कंधे के ऊपर तथा दाईं भुजा के नीचे पहनता है। अर्थात इसे गले में इस तरह डाला जाता है कि वह बाएं कंधे के ऊपर रहे।तीन सूत्र क्यों : जनेऊ में मुख्‍यरूप से तीन धागे होते हैं। प्रथम यह तीन सूत्र त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक होते हैं। द्वितीय यह तीन सूत्र देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रतीक होते हैं और तृतीय यह सत्व, रज और तम का प्रतीक है। चतुर्थ यह गायत्री मंत्र के तीन चरणों का प्रतीक है। पंचम यह तीन आश्रमों का प्रतीक है। संन्यास आश्रम में यज्ञोपवीत को उतार दिया जाता ह
हरतालिका तीज का व्रत

हरतालिका तीज का व्रत

हरतालिका तीज का व्रत हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता हैं . यह तीज का त्यौहार भादो की शुक्ल तीज को मनाया जाता हैं . खासतौर पर महिलाओं द्वारा यह त्यौहार मनाया जाता हैं . कम उम्र की लड़कियों के लिए भी यह हरतालिका का व्रत क्ष्रेष्ठ समझा गया हैं . हरतालिका तीज में भगवान शिव, माता गौरी एवम गणेश जी की पूजा का महत्व हैं . यह व्रत निराहार एवं निर्जला किया जाता हैं . रत जगा कर नाच गाने के साथ इस व्रत को किया जाता हैं .