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हरतालिका तीज पूजन विधी (Hartalika Teej Pujan Vidhi)

हरतालिका पूजन प्रदोष काल में किया जाता हैं . प्रदोष काल अर्थात दिन रात के मिलने का समय .

हरतालिका पूजन के लिए शिव, पार्वती एवं गणेश जी की प्रतिमा बालू रेत अथवा काली मिट्टी से हाथों से बनाई जाती हैं .

फुलेरा बनाकर उसे सजाया जाता हैं .उसके भीतर रंगोली डालकर उस पर पटा अथवा चौकी रखी जाती हैं . चौकी पर एक सातिया बनाकर उस पर थाल रखते हैं . उस थाल में केले के पत्ते को रखते हैं .

तीनो प्रतिमा को केले के पत्ते पर आसीत किया जाता हैं .

सर्वप्रथम कलश बनाया जाता हैं जिसमे एक लौटा अथवा घड़ा लेते हैं . उसके उपर श्रीफल रखते हैं . अथवा एक दीपक जलाकर रखते हैं . घड़े के मुंह पर लाल नाडा बाँधते हैं . घड़े पर सातिया बनाकर उर पर अक्षत चढ़ाया जाता हैं.

कलश का पूजन किया जाता हैं . सबसे पहले जल चढ़ाते हैं, नाडा बाँधते हैं . कुमकुम, हल्दी चावल चढ़ाते हैं फिर पुष्प चढ़ाते हैं .

कलश के बाद गणेश जी की पूजा की जाती हैं .

उसके बाद शिव जी की पूजा जी जाती हैं . इसकी विधी विस्तार से पढ़े .श्रावण सोमवार महत्व एवम कथा  के बारे में जानने के लिए पढ़े.

उसके बाद माता गौरी की पूजा की जाती हैं . उन्हें सम्पूर्ण श्रृंगार चढ़ाया जाता हैं .

इसके बाद हरतालिका की कथा पढ़ी जाती हैं .

फिर सभी मिलकर आरती की जाती हैं जिसमे सर्प्रथम गणेश जी कि आरती फिर शिव जी की आरती फिर माता गौरी की आरती की जाती हैं .

पूजा के बाद भगवान् की परिक्रमा की जाती हैं .

रात भर जागकर पांच पूजा एवं आरती की जाती हैं .

सुबह आखरी पूजा के बाद माता गौरा को जो सिंदूर चढ़ाया जाता हैं . उस सिंदूर से सुहागन स्त्री सुहाग लेती हैं .

ककड़ी एवं हलवे का भोग लगाया जाता हैं . उसी ककड़ी को खाकर उपवास तोडा जाता हैं .

अंत में सभी सामग्री को एकत्र कर पवित्र नदी एवं कुण्ड में विसर्जित किया जाता हैं .