Kavi Kunal (कवि कुणाल)

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सफलता के शिखर पर एकांत ही होगा।

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सारा अम्बर सो जाता है 

सारी धरती रुक जाती है 

जब याद तुम्हारी आती है

एक गुलाब महकने लगता है 

हर फूल चहकने लगता है 

सारी क्यारी मुस्काती है 

जब याद तुम्हारी आती है

दो पहर को चैन नहीं 

जब नैनो को मिलते नैन कहीं

सुकून के हर लम्हे में 

एक बेचैनी भर जाती है 

जब याद तुम्हारी आती है

दिन बन जाता है सोने का

रात चांदी बिखराती है

जब याद तुम्हारी आती है 

क्या कहूं कि कैसे जीता हूँ

बस सपनो को आखों में पी लेता हूँ

जिंदगी तो यूँ भी गुजरती जाती है

पर बड़ा सुकून सा मिलता है

जब याद तुम्हारी आती है

पहले भी टूट कर गिरा हूँ मैं

कुछ वक्त लगा बिखर कर सिमटने में पर जुड़ा हूं मैं।


उम्मीदों के बादल में अरमानों की उड़ान थी मेरी

नाकामियों की बारिश का अंदाजा नहीं था

लड़ने का हौंसला तो था पर इतना ज्यादा नहीं था।

बेशक भीग कर गिरा था पर बारिश से जी भर लड़ा हूं मैं,

पहले भी टूट कर गिरा हूँ मैं

कुछ वक्त लगा बिखर कर सिमटने में पर जुड़ा हूं मैं।


बादलों को देख कर डरता नहीं हूं

कई दफा भीगे पंखों से उड़ा हूं मैं।

पहले भी टूट कर गिरा हूँ मैं

कुछ वक्त लगा बिखर कर सिमटने में पर जुड़ा हूं मैं।

प्रारम्भ से समापन की यात्रा के लगभग  मध्य में आकर।

बेतहाशा दौड़ कर दो पल सुस्ता कर

जब आस पास देखा तो पाया,

कुछ थोड़ा हासिल किया

काफी कुछ गंवाया।

जब प्रारंभ था तो मेरी मंजिल तो यह नहीं थी।

मध्य मे जाना ये तो प्रतियोगिता ही मेरी नही थी।

आज जो हासिल है या जो मुकाम आगे हैं।

क्या वाकई शुरुआत से हम उसके लिए भागे हैं।

जिनके लिए जाना था वो चेहरे तो हैं ही नहीं।

जो हैं वो तो कभी थे ही नहीं।

अब बस मै हूँ और आगे इक रास्ता है।

रुक नहीं सकता राह मे कि बरसों पहले का दिया वास्ता है।

... or jump to: 2019
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Gender:
Man
Age:
33
Full Name:
Kavi Kunal (कवि कुणाल)
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