Bobby Pooja Bulandshahr

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Hindu Festivals Calendar

Hindu calendar is also called as "Panchang" ("Panchanga" or "Panchangam") or "Panjika". it is the astrological calendar used by practicing Hindus. Many different variations of hindu calendar used in different parts of India. Some popular calendars are Kalnirnay, Biraja Panji, Bisuddhasiddhanta Panjika etc.Two popular types of astrological calculation methods are followed for calculating hindu calendar dates:

- Sūrya Siddhāntā (SS, Theory of the Sun) 

- Dṛk Siddhāntā (Empirical Theory)Hindu calendar is based on astrological calculations. It is a lunar calendar which is based on the positions of moon and sun. Five essentials elements of the hindu calendars are Tithi (Thithi), Nakshatra, Yoga, Karana, Paksha and Vaara. Hindu festivals are celebrated as per the Hindu Calendar or Panchang.

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हरतालिका तीज व्रत कथा  (Hartalika Teej Vrta Katha or Story):

यह व्रत अच्छे पति की कामना से एवं पति की लम्बी उम्र के लिए किया जाता हैं .

शिव जी ने माता पार्वती को विस्तार से इस व्रत का महत्व समझाया – माता गौरा ने सती के बाद हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया . बचपन से ही पार्वती भगवान शिव को वर के रूप में चाहती थी . जिसके लिए पार्वती जी ने कठोर ताप किया उन्होंने कड़कती ठण्ड में पानी में खड़े रहकर, गर्मी में यज्ञ के सामने बैठकर यज्ञ किया . बारिश में जल में रहकर कठोर तपस्या की . बारह वर्षो तक निराहार पत्तो को खाकर पार्वती जी ने व्रत किया . उनकी इस निष्ठा से प्रभावित होकर भगवान् विष्णु ने हिमालय से पार्वती जी का हाथ विवाह हेतु माँगा . जिससे हिमालय बहुत प्रसन्न हुए . और पार्वती को विवाह की बात बताई . जिससे पार्वती दुखी हो गई . और अपनी व्यथा सखी से कही और जीवन त्याग देने की बात कहने लगी . जिस पर सखी ने कहा यह वक्त ऐसी सोच का नहीं हैं और सखी पार्वती को हर कर वन में ले गई . जहाँ पार्वती ने छिपकर तपस्या की . जहाँ पार्वती को शिव ने आशीवाद दिया और पति रूप में मिलने का वर दिया .

हिमालय ने बहुत खोजा पर पार्वती ना मिली . बहुत वक्त बाद जब पार्वती मिली तब हिमालय ने इस दुःख एवं तपस्या का कारण पूछा तब पार्वती ने अपने दिल की बात पिता से कही . इसके बाद पुत्री हठ के करण पिता हिमालय ने पार्वती का विवाह शिव जी से तय किया .

इस प्रकार हरतालिक व्रत अवम पूजन प्रति वर्ष भादो की शुक्ल तृतीया को किया जाता हैं .

हरतालिका तीज पूजन विधी (Hartalika Teej Pujan Vidhi)

हरतालिका पूजन प्रदोष काल में किया जाता हैं . प्रदोष काल अर्थात दिन रात के मिलने का समय .

हरतालिका पूजन के लिए शिव, पार्वती एवं गणेश जी की प्रतिमा बालू रेत अथवा काली मिट्टी से हाथों से बनाई जाती हैं .

फुलेरा बनाकर उसे सजाया जाता हैं .उसके भीतर रंगोली डालकर उस पर पटा अथवा चौकी रखी जाती हैं . चौकी पर एक सातिया बनाकर उस पर थाल रखते हैं . उस थाल में केले के पत्ते को रखते हैं .

तीनो प्रतिमा को केले के पत्ते पर आसीत किया जाता हैं .

सर्वप्रथम कलश बनाया जाता हैं जिसमे एक लौटा अथवा घड़ा लेते हैं . उसके उपर श्रीफल रखते हैं . अथवा एक दीपक जलाकर रखते हैं . घड़े के मुंह पर लाल नाडा बाँधते हैं . घड़े पर सातिया बनाकर उर पर अक्षत चढ़ाया जाता हैं.

कलश का पूजन किया जाता हैं . सबसे पहले जल चढ़ाते हैं, नाडा बाँधते हैं . कुमकुम, हल्दी चावल चढ़ाते हैं फिर पुष्प चढ़ाते हैं .

कलश के बाद गणेश जी की पूजा की जाती हैं .

उसके बाद शिव जी की पूजा जी जाती हैं . इसकी विधी विस्तार से पढ़े .श्रावण सोमवार महत्व एवम कथा  के बारे में जानने के लिए पढ़े.

उसके बाद माता गौरी की पूजा की जाती हैं . उन्हें सम्पूर्ण श्रृंगार चढ़ाया जाता हैं .

इसके बाद हरतालिका की कथा पढ़ी जाती हैं .

फिर सभी मिलकर आरती की जाती हैं जिसमे सर्प्रथम गणेश जी कि आरती फिर शिव जी की आरती फिर माता गौरी की आरती की जाती हैं .

पूजा के बाद भगवान् की परिक्रमा की जाती हैं .

रात भर जागकर पांच पूजा एवं आरती की जाती हैं .

सुबह आखरी पूजा के बाद माता गौरा को जो सिंदूर चढ़ाया जाता हैं . उस सिंदूर से सुहागन स्त्री सुहाग लेती हैं .

ककड़ी एवं हलवे का भोग लगाया जाता हैं . उसी ककड़ी को खाकर उपवास तोडा जाता हैं .

अंत में सभी सामग्री को एकत्र कर पवित्र नदी एवं कुण्ड में विसर्जित किया जाता हैं .

हरतालिका पूजन सामग्री (Hartalika Teej Puja Samgri List)

क्र    हरतालिका पूजन सामग्री

1    फुलेरा विशेष प्रकार से  फूलों से सजा होता .

2    गीली काली मिट्टी अथवा बालू रेत

3    केले का पत्ता

4    सभी प्रकार के फल एवं फूल पत्ते

5    बैल पत्र, शमी पत्र, धतूरे का फल एवं फूल, अकाँव का फूल, तुलसी, मंजरी .

6    जनैव, नाडा, वस्त्र,

7    माता गौरी के लिए पूरा सुहाग का सामान जिसमे चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, मेहँदी आदि मान्यतानुसार एकत्र की जाती हैं . इसके अलावा बाजारों में सुहाग पुड़ा मिलता हैं जिसमे सभी सामग्री होती हैं .

8    घी, तेल, दीपक, कपूर, कुमकुम, सिंदूर, अबीर, चन्दन, श्री फल, कलश .

9    पञ्चअमृत- घी, दही, शक्कर, दूध, शहद .

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Bobby Pooja Bulandshahr
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